बस स्टॉप वाला पल
Trained classical, quit at 20 to make pop his teacher would hate
the numbers
- bpm
- 99
- key
- F minor
- energy
- 0.68
- dance
- 0.96
- valence
- 0.61
- vocal at
- 9.5s
- length
- 3:32
- language
- Hi
lyrics
धोबीघाट मोड़ पर बस रुकी थी तेरी कलाई पर नीला धागा दिखा मैंने टिकट जेब में मोड़ के रखी थी तू बोली, “आज मत जा,” और मैं ठहरा था कंडक्टर ने खिड़की पर हाथ मारा घड़ी ने काटा था साढ़े आठ का पहर तेरी उँगली ने मेरे बैग का किनारा छुआ और दिल ने पूछा, अब क्या है यह सफ़र बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल तब हम दोस्त नहीं थे तब हम दोस्त नहीं थे लाल बस के शीशे पर धुंध सी जम गई तेरे होंठों पे चाय की मीठी खुशबू रही मैंने जो कहा, वो हवा में लटक गया तू हँसी, पर आँखों में कोई बात रही कंडक्टर की सीटी, दो सिक्कों की खनक तेरे दुपट्टे का छोर मेरी मुट्ठी में आया जो नाम मैं छिपाता था, वही निकला बाहर और बस ने जैसे बीच में दरवाज़ा लगाया बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल तब हम दोस्त नहीं थे तब हम दोस्त नहीं थे पार्क स्ट्रीट नहीं, वहीं साधारण सा ठहराव बारिश की बूँदें, सीट नंबर का ठंडा निशान तूने कहा “कल,” और मैं समझ गया धीरे से उस मोड़ पे बदल गया मेरा पूरा बयान बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल बस स्टॉप वाला पल तब हम दोस्त नहीं थे तब हम दोस्त नहीं थे
