दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग
Trained classical, quit at 20 to make pop his teacher would hate
the numbers
- bpm
- 99
- key
- D major
- energy
- 0.69
- dance
- 0.95
- valence
- 0.49
- vocal at
- 2.5s
- length
- 3:01
- language
- Hi
lyrics
तीन बजे, फोन रखा था पास बालकनी में कप, ठंडी चाय की आस लाल सिलाई वाली कुर्सी, धुला-सा हाल तुमने उठाया, जैसे कोई काम का सवाल पहली रिंग पर बस सन्नाटा पड़ा दूसरी पर तुम्हारा नाम चमका खड़ा वह पुरानी घड़ी, दीवार पे टिक गई मेरी सांस भी, सुनके, वहीं रुक गई दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग) दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग) तीन बजे भी, तुम ही सही दूसरी रिंग, मेरी दोस्ती हावड़ा की तरफ़ से आया ट्रेन का शोर मेरे कमरे में, बस तुम्हारी आवाज़ और पुरानी जीन्स, मेज़ पे पड़े दो टिकट तुमने कहा, “बोल, क्या हुआ?” — मैं हुआ लिकट दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग) दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग) तीन बजे भी, तुम ही सही दूसरी रिंग, मेरी दोस्ती काँच के गिलास में आधा रह गया पानी फोन की स्क्रीन पर नीली-सी रवानी तुमने हँसकर कहा, “मैं जगा हूँ यहीं” कोलकाता की रात में, बस हम दो नहीं दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग) दूसरी रिंग, दूसरी रिंग (दूसरी रिंग) तीन बजे भी, तुम ही सही दूसरी रिंग, मेरी दोस्ती
