मैं यहीं था, मैं यहीं था
Trained classical, quit at 20 to make pop his teacher would hate
the numbers
- bpm
- 99
- key
- D minor
- energy
- 0.71
- dance
- 0.95
- valence
- 0.47
- vocal at
- 8.3s
- length
- 3:34
- language
- Hi
lyrics
जून की दोपहर, खिड़की पर धूल जमी चाय की प्याली ठंडी, मेज़ पे अधजली बस स्टैंड सूना था, छूट गई हर गली मैं अकेला रह गया, तुम सब हो गए चली घड़ी में चार बजे, पंखा बस घूमे छत पे पड़े केले, धूप में तुम न दिखे निमक की पुड़िया, और अख़बार पुराना मैंने नाम लिख दिया, दीवार पे फिर से मैं यहीं था, मैं यहीं था मैं यहीं था, मैं यहीं था गर्मियों में सब गए, मैं यहीं था मैं यहीं था, मैं यहीं था रात को नौ बजे, रेलवे पटरी पास कुल्फ़ी वाले की घंटी, खाली सी आवाज़ आँगन में टँगा कपड़ा, सूखा हुआ लाल तुम्हारी छोड़ी कुर्सी, रखी रही बेहाल टिफ़िन में बासी भात, और नींबू का अचार मोर के पंख जैसा, हवा का ये वार टपकती टोंटी के नीचे, गिनता रहा मैं कब लौटा वो मौसम, कब लौटा शहर मैं यहीं था, मैं यहीं था मैं यहीं था, मैं यहीं था गर्मियों में सब गए, मैं यहीं था मैं यहीं था, मैं यहीं था बरामदे की सीढ़ी, अब भी है ठंडी मैंने रख दी पुरानी चप्पल, वही काली अगर तुम लौट आओ, तो मिलूँगा वहीं जहाँ छूटा था नाम, और बची थी रोटी मैं यहीं था, मैं यहीं था मैं यहीं था, मैं यहीं था गर्मियों में सब गए, मैं यहीं था मैं यहीं था, मैं यहीं था
