अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा
Trained classical, quit at 20 to make pop his teacher would hate
the numbers
- bpm
- 99
- key
- F minor
- energy
- 0.70
- dance
- 0.95
- valence
- 0.60
- vocal at
- 4.3s
- length
- 3:16
- language
- Hi
lyrics
एस्प्लानेड की दुपहर थी, चाय की कागज़ी गंध मैंने मोड़ पे देखा तुझे, साफ़ थी तेरी रंग तेरे हाथ में नीली छतरी, सफ़ेद कुर्ता था साथ मैं चुप रहा, पर दिल ने कहा, आज नहीं है रात तू हँसा तो चेहरा खुल गया, धूप में पिघली ख़ास मैंने देखा, तू ठीक है अब, हल्की सी राहत पास कोलकाता की भीड़ में भी, थम गई एक सांस जो टूट गया था कल तक, आज वही मेरे पास अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा तेरे चेहरे पे सुकून था अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा बस से उतरी, लाल साड़ी, बालों में हल्की हवा कॉफी हाउस की खिड़की पर, धूप ने लिखी दुआ तेरी आँखों में थकान नहीं, न माथे पे कोई दाग मैंने मन ही मन कह दिया, चल, तू अपना भाग अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा तेरे चेहरे पे सुकून था अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा मैंने पुराने पन्ने बंद किए, जेब में रख दी चिट्ठी तेरी राह नहीं, मेरी राह अब, सीधी सी एक गिट्टी अगर कल फिर मिलना हो कहीं, ऐसे ही खुले आसमान मैं बस यही कहूँगा तुझसे, खुश रह, बस इंसान अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा तेरे चेहरे पे सुकून था अच्छा लगा, अच्छा लगा, अच्छा लगा
